देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और सरकार की नीतियों के विरोध में जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। एबीपी न्यूज़ की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में वांटेड अपराधी पहुंचे थे। पुलिस के अनुसार, फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों की मदद से अब तक 216 में से 215 वांटेड अपराधियों की पहचान की जा चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक, इन पहचाने गए लोगों के खिलाफ विभिन्न आपराधिक मामलों में पहले से तलाश जारी है। पुलिस का दावा है कि इनमें से कई संदिग्ध प्रदर्शन की आड़ में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और हिंसा भड़काने के इरादे से जंतर-मंतर पहुंचे थे। रिपोर्ट के अनुसार, इन संदिग्धों की तस्वीरें और संबंधित जानकारी जांच एजेंसियों के पास मौजूद हैं और उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
क्या प्रदर्शन स्थल अपराधियों की शरणस्थली बन रहा है?
दिल्ली पुलिस के इस दावे के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या बड़े सार्वजनिक आंदोलनों की आड़ लेकर वांटेड अपराधी भीड़ में छिपने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, यह स्पष्ट करना भी आवश्यक है कि किसी प्रदर्शन स्थल पर किसी व्यक्ति की मौजूदगी मात्र से यह साबित नहीं होता कि आयोजकों का उससे कोई संबंध है। किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी और दोष का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
सूत्रों का दावा है कि प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में अपराधियों की मौजूदगी के कारण दिल्ली के अन्य हिस्सों में अपराध की घटनाओं में अस्थायी कमी भी देखने को मिली। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
FRS कैमरे क्यों लगाए गए?
दिल्ली पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरे लगाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि उसे केंद्रीय एजेंसियों से ऐसी खुफिया सूचनाएं मिली थीं कि कुछ असामाजिक तत्व और वांटेड अपराधी प्रदर्शन का फायदा उठाकर राजधानी का माहौल खराब करने की कोशिश कर सकते हैं।
इसी आशंका के मद्देनज़र नई दिल्ली जिले के संवेदनशील इलाकों में FRS कैमरे स्थापित किए गए ताकि प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान की जा सके और कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके। दिल्ली पुलिस का कहना है कि ऐसे कैमरों का उपयोग बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों, रैलियों और भीड़-भाड़ वाले आयोजनों में सुरक्षा कारणों से पहले भी किया जाता रहा है।
जांच जारी, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल दिल्ली पुलिस ने इस मामले में विस्तृत आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की है। जांच एजेंसियां FRS से प्राप्त डेटा, वीडियो फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का मिलान कर रही हैं। यदि किसी व्यक्ति की भूमिका कानून-व्यवस्था भंग करने, हिंसा भड़काने या अन्य आपराधिक गतिविधियों में पाई जाती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस घटनाक्रम के बीच जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन जारी है, जबकि सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।




